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महिला पहलवानों की सुरक्षा के लिए क्यों आगे आया सुप्रीम कोर्ट?

 सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आज दुष्कर्म के आरोपी बृजभूषण के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है, यह कितना शर्मनाक है कि देश के नामचीन अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को एक एफआईआर दर्ज करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा है। सरकार की यह प्रवृत्ति संविधान के समक्ष एक बड़ी चुनौती है , जनता को चाहिए कि वो संविधान की सुरक्षा करने के लिए अपना कर्तव्य सही तरीके से निभाएं। तानाशाही को चुनोगे तो इस तरह की तानाशाही झेलने के लिए तैयार भी रहना चाहिए। आम आदमी के लिए यह एक असंभव सा काम है कि वो अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकें। दिल्ली के साकेत में एक महिला को एक व्यक्ति कोर्ट में ही गोलियों से भून देता है। देश के सभी कोर्ट परिसर संविधान के संरक्षक हैं, देश की जनता के रक्षक है और उस जगह पर ही कोई नागरिक एक अपराधी द्वारा गोलियों से भून दिया जाता है, सोचिए यह कितना शर्मनाक है कि इस पर कोई देशव्यापी एक्शन नहीं लिया जाता है। हमारे कोर्ट परिसरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए क्योंकि यहां न्यायाधीशों , अधिवक्ताओं, स्टाफ और नागरिकों की सुरक्षा एक गंभीर मसला है इसे हल्के में लेना संविधान के प्रति निष्ठ...

क्रिकेट की दुनिया से घूमते हुए भारत एक दृष्टि - रक्षित परमार

 मैं धोनी का फैन हूं लेकिन कभी सोशल‌ मीडिया पर धोनी के बारे में, उनकी कप्तानी और उनके व्यवहार के बारे में कुछ लिख नहीं पाया । मेरी फेवरिट टीम के खिलाडी वैसे सौरव गांगुली, सचिन , विरेन्द्र सहवाग, युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ, वीवी एस लक्ष्मण, अनिल कुंबले, हरभजन, सिंह,‌ ज़हीर खान और धोनी साहब है। उसके बाद क्रिकेट मेरे जीवन से लगातार गायब होता जा रहा है। अभी के प्लेयर भले ही अच्छा खेल रहे हो लेकिन 2003 और 2010 के बीच में हुए क्रिकेट मैचों जैसा रोमांच अब बचा नहीं है मेरे‌ लिए क्रिकेट में । विश्व के स्तरीय खिलाड़ियों को एक साथ देखने का अलग ही सुकून था । भारत की टीम उस दौर में भले ही थोड़ी कमजोर थी लेकिन उस समय के ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का स्तर भी तो कमाल का था ‌।  ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट, मेथ्यू हैडन , जेशन गिलेस्पी, एंड्र्यू साइमंड्स, रिकी पोंटिंग, शेन वॉर्न, ग्लेन मैकग्राथ जैसे प्लेयर अब मैचों में कहीं नहीं दिखते हैं । बैटिंग, फिल्डिंग, बोलिंग और हर मैच को केवल जीतने के लिए उतरने वाली ये ऑस्ट्रेलियाई टीम विश्व की सभी टीमों के लिए खासतौर पर ये खिलाड़ी बहुत भारी पड़ते थे । इनको ...

ग्रामीण महिला उद्यमियों को मिलें शहरी प्रोत्साहन

 ग्रामीण महिला उद्यमियों को मिलें शहरी प्रोत्साहन  देश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं के योगदान को नकारा नहीं जा सकता , अब इस दौड़ में ग्रामीण महिलाएं भी पीछे नहीं रहना चाहती हैं। हैंड इन हैंड इंडिया एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान है जो महिलाओं के सशक्तिकरण में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में संस्थान ने विगत एक साल से क्रेडिट प्लस , राइज अप और सिडबी प्रोजेक्ट के तहत ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मुहैया करवाने में सहयोग किया है । संस्थान द्वारा उदयपुर और सिरोही जिले में वर्मी कम्पोस्ट की 50 युनिट स्थापित करवाई गई हैं । युनिट के तहत केंचुए , त्रिपाल , प्रशिक्षण और कंपोस्ट का मूल्यवर्धन कर ग्रामीण महिलाओं को उद्यमशीलता की ओर बढ़ाने में मदद की है ‌।  संस्थान ने जुलाई 2021 से 40 किलो केंचुए लगभग आधे टन आकार की प्रति युनिट बनवाकर महिला किसानों की आय में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज करवाई है। इस आकार की 50 युनिट के माध्यम से स्थानीय 1000 महिला किसानों तक लाभ पहुंचाने का सामूहिक प्रयास किया गया है । अब महिलाएं वर्मी कम्पोस्ट , केंचुए , वर्मी वाश बेचकर अच्छी आय सृजित कर र...

देश प्रदेश की दीवारों को लांघकर

 देश प्रदेश की दीवारों को लांघकर  ज़िंदगी में सबसे बड़ी अगर कोई प्रतिस्पर्धा है तो वो बस खुद से ही है ! सच माने तो खुद से ज़्यादा हमें इस सृष्टि में कोई नहीं जानता ! खुद की नज़रों में हम जो कुछ भी होते है , उसे आकार देने की कोशिश में बरसों बस यूं ही गुज़र जाते हैं ! हमारे मन-मस्तिष्क को हम बहुत बार उतना नहीं जान पाते जितना दुनिया के कुछ महान लोगों ने उनके अपने दिमाग़ को भीतर से जाना है !  मानवीय वैचारिकी की जटिलताओं के दायरे हर एक विषय के अलग - अलग है ! भले ही वो दार्शनिकता या आध्यात्मिकता हो , गणितीय या भौतिकीय विषयों की जटिलताएं हो ! रसायनिकी, तार्किकता तथा कलाओं की कलिष्टतम जटिलताएं ही क्यों न हो ! जिन्हें कुछ विरले लोग ही सुलझा पाते है , वो लोग दुनिया में महानता की ओर धीरे - धीरे अग्रसर होते गए हैं ! जटिलताओं को सरलताओं में तब्दील करके , ऐसी विभुतियों के महान विचारों के आगे मन नतमस्तक सा होने लगता है । दुनिया में कुछ लोग ऐसे हुए हैं जिन्होंने वैश्विक समुदाय का नेतृत्व किया है , मैं सीधे शब्दों में कहूं तो देश -प्रदेश की दीवारों को लांघकर समूचे विश्व को या इस ब्रम्हांड...

आने वाली पीढ़ी के लिए ‘हमारी धरोहरों’’ का संरक्षण आवश्यक है।

आने वाली पीढ़ी के लिए ‘हमारी धरोहरों’’ का संरक्षण आवश्यक है। 18 अप्रेल 2023, विश्व विरासत दिवस के अवसर पर भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर में सांस्कृतिक निधी न्यास, उदयपुर स्कन्ध (इंटेक) के संयुक्त तत्वावधान में हमारी धरोहर विषय पर संगोष्टी का आयोजन हुआ जिसमें विद्धवानों ने हमारे देश की बहुमूल्य धरोहर को आने वाली पीढ़ी के लिए संरक्षित करने पर जो़र दिया। भारतीय लोक कला मण्डल,उदयपुर के निदेशक डाॅ. लईक हुसैन ने बताया कि आज पूरे विश्वभर में 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस के रूप में मनाया जा रहा है और इसी क्रम में भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर में सांस्कृतिक निधी न्यास, उदयपुर स्कन्ध (इंटेक) के संयुक्त तत्वावधान में हमारी धरोहर विषय पर संगोष्ठी का आयोजन भारतीय लोक कला मण्डल के गोविन्द कठपुतली सभागार में दोपहर 03 बजे से किया गया। जिसमें शहर के साहित्यकार, कलाप्रेमी, इतिहासकार, विद्यार्थियो एवं आम जन ने भाग लिया।  उन्होंने बताया कि संगोष्ठी के प्रारम्भ में संस्था के मानद सचिव सत्य प्रकाश गौड़, भारतीय लोक कला मण्डल के निदेशक डाॅ. लईक हुसैन, सांस्कृतिक निधि न्यास, उदयपुर स्कंध के संयोजक डाॅ. ल...
 बदलाव की राह छोड़ बदले की भावना से कारवाई करती केंद्र की सरकार  भारत में जब भी कोई राजनीतिक दल बहुमत में आता है तब लोगों में एक बड़ी उम्मीद दिखाई देती हैं कि वाकई अब अच्छा काम देखने को मिलेगा । हम देश की जनता का यह भ्रम बहुत बार टूटता जाता है जब बहुमत वाली सरकारें पक्ष -विपक्ष में भेद रखते हुए काम करती हैं । बहुमत वाली सरकारें चाहती हैं संसदीय कार्यवाही में उनका ही एकाधिकार रहे और वो भी दीर्घकालिक हो ऐसा करने के लिए वो खरीद फरोख्त का सहारा लेती हैं।  विधायकों को खरीदने के लिए अनेक प्रलोभन , अकूत धन दौलत , राजनीतिक लाभ और भ्रष्टाचार से बचाव के हथकंडे अपनाए जाते हैं । हालिया खबरों पर ध्यान दें तो ईडी , सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग के माध्यम से सरकार ने विपक्षियों को जिस तरह से परेशान कर रखा है स्पष्ट है कि विपक्ष को निष्क्रिय करके सरकार लम्बे समय तक सत्ता में काबिज रहना चाहती है। ऐसे में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और यूपीए अध्यक्ष रही सोनिया गांधी को ईडी कार्यालय बुलाएं जाने पर कांग्रेसियों ने दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन कर चिंता जाहिर की हैं । भारत के लोकतंत्र...

मानवजनित आपदाओं की पुनरावृत्ति - युद्धों की बारंबारता से बढ़ा देश में संघर्ष

  मानवजनित आपदाओं की पुनरावृत्ति - युद्धों की बारंबारता से बढ़ा देश में संघर्ष  "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा " नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के इस कथन को‌ हम कैसे देखते हैं , कोई सोचता है खून देना है , कोई सोचते हैं बलिदान देना हैं , कोई कहते हैं अंग्रेजों से लोहा लेना है , तो कोई कहते हैं नेताजी के साथ खड़ा होना है । अलग -अलग विचारों का पुंज मिलकर अनेक विचारधाराओं को जन्म होता है । हमारा भारत देश आज़ाद हुआ तब चुनौतियां कोई एक सी नहीं थी , देश की बढ़ती जनसंख्या , उनका भरण पोषण और नीति निर्धारण , राष्ट्र को गति देना बिल्कुल भी आसान काम नहीं रहा होगा। मुश्किल दौर से गुजरने के लिए हजारों -लाखों लोगों ने इस देश को अपनी पूरी ताक़त से खड़ा किया क्योंकि अंग्रेजों के दिए दंश यूं ही जमें पड़े थे। वह दौर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिए चुनौतीपूर्ण दौर था , एक तरफ़ देश को खड़ा करें दूसरी चीन का आक्रामक रवैया भारत के लिए एक बड़ी मुश्किल लेकर तैयार था। समय की सूझबूझ ने उन घावों को भरने का प्रयास ज़रूर किया हैं , देश आज तेजी से विकास की ओर प्रगतिशील हैं । देश के पू...