संदेश

यूक्रेन पर हमला क्या शांति प्रिय देशों के लिए ख़तरा ??

चित्र
  यूक्रेन पर हमला शांति प्रिय देशों के लिए ख़तरा रूस के द्वारा यूक्रेन पर हमले को एक नई लड़ाई के तौर पर देखना चाहिए , एक तरफ़ विश्व राजनीति में चाइना के बढ़ते प्रभाव के बीच रूस की तानाशाही ने दुनिया को बहुत कुछ सोचने पर मजबुर कर दिया है । अफगानिस्तान से अमेरिका का भागना , यूक्रेन पर हमला होने के बावजूद अमेरिका द्वारा पहले तो उसे भरोसा दिलाना, बाद में अब केवल टुकुर- टुकुर देखना साबित करता है कि ,विश्व राजनीति में अमेरिका के पांव अब कमजोर पड़ रहे हैं ।  चीन द्वारा रूस को बिना मांगे ही अप्रत्यक्ष रूप से तो समर्थन करना लेकिन यूएन सुरक्षा परिषद में लाएं गए निंदा प्रस्ताव पर वोट न करना , ऐसा लगता है चीन भी निकट भविष्य में कोई बड़ी हरकत कर सकता है या उसकी योजनाओं में यह ज़रूर होगा , विशेष कर ताईवान और भारत के संदर्भ में , जैसा कि पूर्व में उसकी बदमाशियां देखी गई है ।  हमारे देश के लिए हमेशा की तरह एक निर्णायक बनकर खड़े रहने की भूमिका वाला यह दौर नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी को इस समय विश्व के सभी देशों से आग्रह कर शांति व्यवस्था स्थापित करने के प्रयास तेज करने चाहिए । इससे भी पहले...

काव्य गोष्ठी का आयोजन

चित्र
 प्रेस विज्ञप्ति  उदयपुर  गुरूवार 4/5/2023    जाने अनजाने रिश्ते भी खास हो जाते है  जब पैसे दो पैसे किसी के पास हो जाते है  मंगलवार दिनांक 2/5/23 को कविमित्र समूह ( राज. ) , उदयपुर द्वारा एक काव्य गोष्ठी का आयोजन सेक्टर 3 में किया गया जिसमें शहर के प्रतिष्ठित कवि शामिल हुए. गोष्ठी का प्रारंभ नामचीन कवि और एंकर शकुंतला सरूपरिया जी ने अपने भावपूर्ण गीतों से किया, बेटी पर सुनाये उनके गीत से श्रोताओं की आंखें भर आई . युगधारा संस्थापक वरिष्ठ कवि ज्योतिपूंज ने आम आदमी की पीड़ा को जाहिर करती अपनी कविता ' नल में जल नहीं है पर आंखों में है ' सुनाई . रामदयाल मेहरा ने अपनापन नहीं याद रहा अब / मतलब का संवाद रहा अब ' सुनाकर दाद बटोरी . शैलेंद्र सुधर्मा ने ' जो बात खुद ही न समझे / वो औरों को समझाना अच्छा लगता है ' तथा प्रेमलता सोलंकी ने ' तुमको लिखती और पढती रही / लिख , गजल गुनगुनाती रही रात भर ' सुनाकर गोष्ठी को आगे बढाया . युवा कवि रक्षित परमार ने आज के समय की सच्चाई को बयान करती 'बेटियों कहीं सुरक्षित नहीं है' रचना पेश की . गोष्ठी का समापन शाइर इकबाल हुसैन ...

भारत में बेरोजगारी दर फिर से बढ़ रही है ? पर क्यों?

चित्र
 भारत की बे बेरोज़गारी दर  रोजगारी दर शहरों में ज्यादा, गांवों में कम ?  सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी के आंकड़े के अनुसार भारत की बेरोजगारी दर 7.83 किस दी पर पहुंची ‌ । हमारे देश में बेरोजगारी की समस्या निरंतर बढ़ती जा रही है पिछले महीने में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 7.83 फेस दीपक पहुंच गए हैं मार्च महीने में यह 7.60 किस दी थी आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2022 में शहरों की बेरोजगारी दर 9.22 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 7.18 फीसदी रही है‌। वर्ष 2021 में मई महीने में बेरोजगारी 11.84 फीसद पहुंच गई थी । सबसे ज्यादा बेरोजगारी तो हमारे राज्य राजस्थान और पड़ोसी राज्य हरियाणा में देखने को मिली है । इस रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा बेरोजगारी हरियाणा और राजस्थान में दर्ज की गई है। हरियाणा में यह 34.5 प्रतिशत और राजस्थान में 28.8 फ़ीसद बेरोजगारी है ।‌हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम में सबसे कम बेरोजगारी दर देखी गई है। इन राज्यों में क्रमशः 0.2%, 0.6% और 1.2 फ़ीसद रही थी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी के ये ताज़ा आंकड़े भारतीय इकोनॉमी की हेल्थ को दर्शाते हैं । इसके अ...

देश के जाने माने पत्रकार रवीश कुमार की मां का निधन

चित्र
देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की मां निधन हो गया है। इस समय रवीश कुमार बेल्जियम में है जबकि उनकी मां का बिहार में निधन हो चुका है। रवीश ने भावुक होकर पोस्ट लिखी है जिसे पढ़कर हर गमगीन हो गया । रवीश कुमार देश के एक ऐसे पत्रकार जो अपनी बेबाक रिपोर्टिंग, रवीश की रिपोर्ट और अपने यूट्यूब चैनल के जरिए देश की मौजूदा सरकार पर तीखे सवाल खड़े करते हैं और सरकार की आंखों की किरकिरी बनी हुई है। रवीश कुमार ने एक भावुक पोस्ट लिखी है जिसे आपको भी पढ़ना चाहिए -  माँ  सोचा था ब्रसल्स को अपने लिए नहीं, अपने दर्शकों के लिए देखूंगा। यहां आते ही सब कुछ कैमरे के पीछे से देखने लगा। ज़हन में मां बनी रही कि वेंटिलेटर पर नहीं होती तो वही ज़्यादा खुश रहती, भले ही ब्रसल्स बोलना उसके लिए भारी हो जाता। इस सूचना को लेकर अपने साथ जीना पहाड़ ढोने के समान लग रहा है। यहां की इमारतों से न तो इतिहास का रिश्ता बना पा रहा हूं, न वर्तमान का। देख रहा हूं मगर कुछ नहीं दिख रहा है। चल रहा हूं लेकिन पता नहीं कितनी दूर चल गया और लौट कर आ गया। इस वक्त लिख रहा हूं ताकि खुद के साथ रह सकूं। मेरे लिए जीना लिखना है ...

किराडू के मंदिर (बाड़मेर) वर्ष: 2018

चित्र
किराडू के मंदिर (बाड़मेर) 18 इन मंदिरों को देखना एक बड़ी उपलब्धि थी , इन मंदिरों के प्राचीन अवशेष देखकर लगता है कि आखिर क्या हुआ होगा उस दौरान! आज के समय एक बड़ी चुनौती है ऐसी कलाकृतियां, नक्काशी और स्थापत्य के प्रति उतना समर्पण देख पाना ‌। स्थापत्य कलाकारों और उन असंख्य श्रमिकों के बारे में कहीं कोई ज़िक्र नहीं मिलता। एक प्राचीन नगर के उजड़ते स्वरूप को आज के दौर में देख पाना भी एक दुर्लभ अहसास है और इतिहास में दबे गूढ़ रहस्यों को जानने की मेरी मंशा ने किराडू को एक अलग दृष्टि से ही देखा । इस जगह के बारे में भ्रांतियां बहुत है, शाम को पांच बजे बाद प्रवेश आज भी बंद हैं । बाड़मेर से पश्चिम में अवस्थित यह पुरास्थल देखने लायक है।

कासिम बीकानेरी के हिन्दी कहानी संग्रह दादाजी की साईकल का लोकार्पण समारोह संपन्न

चित्र
क़ासिम बीकानेरी के हिंदी कहानी संग्रह दादाजी की साइकल का लोकार्पण समारोह संपन्न ---------------------------------------------------- संस्कारों एवं संवेदना का सच्चा दस्तावेज दादाजी की साइकल : मधु आचार्य बीकानेर 01 मई 2023 नागरी भण्डार पाठक मंच एवं प्रज्ञालय संस्थान द्वारा नगर के युवा शायर कहानीकार क़ासिम बीकानेरी के राष्ट्रीय कवि चौपाल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित नये हिंदी कहानी संग्रह दादाजी की साइकल का लोकार्पण समारोह स्थानीय महाराजा नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम नागरी भण्डार स्टेशन रोड बीकानेर में हुए भव्य समारोह के रूप में आयोजित किया गया। नागरी भण्डार पाठक मंच के नंदकिशोर सोलंकी ने बताया कि दादाजी की साइकल कहानी संग्रह का लोकार्पण समारोह हिंदी एवं राजस्थानी भाषा के कीर्तिशेष साहित्यकार स्वर्गीय लक्ष्मीनारायण रंगा साहब को समर्पित किया गया। प्रज्ञालय संस्थान के राजेश रंगा ने बताया कि लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भवानी शंकर व्यास 'विनोद' ने की। विनोद ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कहा कि दादाजी की साइकल की अधिकांश कहानियां मार्मिकता एवं संवेदना के ...

1 मई मजदूर दिवस और मधु लिमए की 100 वीं जयंती पर उदयपुर में हुआ आयोजन?

चित्र
सत्ता ने भूख को शोषण का हथियार बनाया । 1 मई मजदूर दिवस व समाजवादी नेता मधु लिमए की 100 वी जयंती को समारोह पूर्वक मनाया गया इस अवसर पर मजदूर आंदोलन के समक्ष चुनौतियो विषय एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । समता संवाद पिछले तीन दशक से गैर बराबरी के विरुद्ध जागृति हेतु प्रयासरत रहते हुए जन विमर्श में आम जन के विषयों पर नियमित पाक्षिक संवाद आयोजन करते है। समता संवाद के डॉ भरत सिंह राव ने बताया कि संवाद कार्यक्रम में मजदूर आंदोलन ओर वर्तमान चुनोतियाँ विषय बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्गिय चेतना के अभाव के चलते मजदूरों में अपने हितों की रक्षा के नाम पर गलत लोगों के जाल में फंसकर अपना शोषण करवाने को मजबूर हैं। उपस्थित सभी वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान केंद्र और राज्य सरकारों का चरित्र और सोच मजदूर विरोधी है ।कार्यक्रम मै अर्जुन देथा, सुधिर कटियार, अरुण व्यास, शंकर लाल चौधरी, डॉ फरहत बानू, डॉ सुधा चौधरी,. राम चंद्र सालवी,शेलेंद्र ढड्ढा ने अपने व विचार व्यक्त किए । कार्यक्रम की अध्यक्षता हिम्मत सेठ ने की तथा पियूष जोशी ने आभार व्यक्त किया।